Friday, September 28, 2018

पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है श्राद्ध

पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धा का प्रतीक है। पितरों के निमित्त विधिपूर्वक जो कर्म श्रद्धा से किया जाता है, उसी को श्राद्ध कहते हैं। ब्रह्म पुराण के अनुसार श्राद्ध की परिभाषा है, जो कुछ उचित काल, पात्र एवं स्थान के अनुसार उचित (शास्त्रानुमोदित) विधि द्वारा पितरों को लक्ष्य करके श्रद्धापूर्वक ब्राह्मणों को दिया जाता है, श्राद्ध कहलाता है। हिंदू धर्म के अनुसार, प्रत्येक शुभ कार्य के प्रारंभ में माता-पिता, पूर्वजों को नमस्कार या प्रणाम करना हमारा कर्त्तव्य है, हमारे पूर्वजों की वंश परंपरा के कारण ही हम आज यह जीवन देख रहे हैं, इस जीवन का आनंद प्राप्त कर रहे हैं। इस धर्म में, ऋषियों ने वर्ष में एक पक्ष को पितृपक्ष का नाम दिया, जिस पक्ष में हम अपने पितरेश्वरों का श्राद्ध, तर्पण, मुक्ति हेतु विशेष क्रिया संपन्न कर उन्हें अर्घ्य समर्पित करते हैं। यदि किसी कारण से उनकी आत्मा को मुक्ति प्रदान नहीं हुई है तो हम उनकी शांति के लिए विशिष्ट कर्म करते हैं, जिसे श्राद्ध कहते हैं।
श्राद्ध-कर्म में पके हुए चावल, दूध और तिल को मिश्रित करके पिंड बनाते हैं, उसे सपिंडीकरण कहते हैं। पिंड का अर्थ है शरीर। यह एक पारंपरिक विश्वास है, जिसे विज्ञान भी मानता है कि हर पीढ़ी के भीतर मातृकुल तथा पितृकुल दोनों में पहले की पीढि़यों के समन्वित गुणसूत्र उपस्थित होते हैं। चावल के पिंड जो पिता, दादा, परदादा और पितामह के शरीरों का प्रतीक हैं, आपस में मिलकर फिर अलग बांटते हैं। यह प्रतीकात्मक अनुष्ठान जिन जिन लोगों के गुणसूत्र (जीन्स) श्राद्ध करने वाले की अपनी देह में हैं, उनकी तृप्ति के लिए होता है।
दैनिक पंच यज्ञों में पितृ यज्ञ को खास बताया गया है। इसमें तर्पण और समय-समय पर पिंडदान भी सम्मिलित है। पूरे पितृपक्ष भर तर्पण आदि करना चाहिए। इस दौरान कोई अन्य शुभ कार्य या नया कार्य अथवा पूजा-पाठ अनुष्ठान संबंधी नया काम नहीं किया जाता। साथ ही श्राद्ध नियमों का विशेष पालन करना चाहिए। परंतु नित्य कर्म तथा देवताओं की नित्य पूजा जो पहले से होती आ रही है, उसको बंद नहीं करना चाहिए।
जन्म एवं मृत्यु का रहस्य अत्यंत गूढ़ है। वेदों में, दर्शन शास्त्रों में, उपनिषदों एवं पुराणों आदि में हमारे ऋषियों-मनीषियों ने इस विषय पर विस्तृत विचार किया है। श्रीमद्भागवत में भी स्पष्ट रूप से बताया गया है कि जन्म लेने वाले की मृत्यु और मृत्यु को प्राप्त होने वाले का जन्म निश्चित है। यह प्रकृति का नियम है। शरीर नष्ट होता है मगर आत्मा कभी भी नष्ट नहीं होती है। वह पुनः जन्म लेती है और बार-बार जन्म लेती है। इस पुनः जन्म के आधार पर ही कर्मकांड में श्राद्धदि कर्म का विधान निर्मित किया गया है। अपने पूर्वजों के निमित्त दी गई वस्तुएं सचमुच उन्हें प्राप्त होती हैं या नहीं, इस विषय में अधिकांश लोगों को संदेह है। हमारे पूर्वज अपने कर्मानुसार किस योनि में उत्पन्न हुए हैं, जब हमें इतना ही नहीं मालूम तो फिर उनके लिए दिए गए पदार्थ उन तक कैसे पहुंच सकते हैं? क्या एक ब्राह्मण को भोजन कराने से हमारे पूर्वजों का पेट भर सकता है? न जाने इस तरह के कितने ही सवाल लोगों के मन में उठते होंगे। वैसे इन प्रश्नों का सीधे-सीधे उत्तर देना संभव भी नहीं है, क्योंकि वैज्ञानिक मापदंडों को इस सृष्टि की प्रत्येक विषयवस्तु पर लागू नहीं किया जा सकता। दुनिया में ऐसी कई बातें हैं, जिनका कोई प्रमाण न मिलते हुए भी उन पर विश्वास करना पड़ता है।
श्राद्ध दिवस से पूर्व दिवस को बुद्धिमान पुरुष श्रोत्रिय आदि से विहित ब्राह्मणों को पितृ-श्राद्ध तथा वैश्व-देव-श्राद्ध के लिए निमंत्रित करें। पितृ-श्राद्ध के लिए सामर्थ्यानुसार अयुग्म तथा वैश्व-देव-श्राद्ध के लिए युग्म ब्राह्मणों को निमंत्रित करना चाहिए। निमंत्रित तथा निमंत्रक क्रोध, स्त्रीगमन तथा परिश्रम आदि से दूर रहे।
पितृ का अर्थ
पितृ का अर्थ है पिता, किंतु पितर शब्द जो दो अर्थों में प्रयुक्त हुआ है ः व्यक्ति के आगे के तीन मृत पूर्वज, मानव जाति के प्रारंभ या प्राचीन पूर्वज जो एक पृथक लोक के अधिवासी के रूप में कल्पित हैं।
तर्पण
आवाहन, पूजन, नमस्कार के उपरांत तर्पण किया जाता है। जल में दूध, जौ, चावल, चंदन डाल कर तर्पण कार्य में प्रयुक्त करते हैं। मिल सके तो गंगा जल भी डाल देना चाहिए। तृप्ति के लिए तर्पण किया जाता है। स्वर्गस्थ आत्माओं की तृप्ति किसी पदार्थ से, खाने-पहनने आदि की वस्तु से नहीं होती, क्योंकि स्थूल शरीर के लिए ही भौतिक उपकरणों की आवश्यकता पड़ती है। मरने के बाद स्थूल शरीर समाप्त होकर, केवल सूक्ष्म शरीर ही रह जाता है। सूक्ष्म शरीर को भूख-प्यास, सर्दी-गर्मी आदि की आवश्यकता नहीं रहती, उसकी तृप्ति का विषय कोई खाद्य पदार्थ या हाड़-मांस वाले शरीर के लिए उपयुक्त उपकरण नहीं हो सकते। सूक्ष्म शरीर में विचारणा, चेतना और भावना की प्रधानता रहती है, इसलिए उसमें उत्कृष्ट भावनाओं से बना अंतःकरण या वातावरण ही शांतिदायक होता है।

Friday, September 14, 2018

रेलवे ग्रुप डी परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी, यूं करें डाउनलोड

लवे ग्रुप डी के जिन उम्मीदवारों की परीक्षा 17 सितंबर को है, उनके एडमिट कार्ड जारी कर दिए गए हैं। रेलवे ने घोषणा की थी कि परीक्षा तिथि से चार दिन पहले एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। इससे पहले रेलवे ने एसएसी/एसटी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए ट्रेवल अथॉरिटी भी जारी कर दी। साथ ही सभी उम्मीदवारों के लिए मॉक लिंक भी एक्टिवेट कर दिया ताकि कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) की प्रैक्टिस की जा सके, उसे समझा जा सके।
इसके अलावा आज उन शेष उम्मीदवारों की परीक्षा तिथि, शहर व शिफ्ट की भी घोषणा की जाएगी जिनकी 09 सितंबर को नहीं की गई थी। 09 सितंबर को सिर्फ उन अभ्यर्थियों  परीक्षा के लिए जानें से पहले एडमिट कार्ड ले जाना न भूलें। एडमिट कार्ड देखकर ही आपको परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया जाएगा।
2. पहचान पत्र- कई बार एग्जाम सेंटर पर आपका पहचान पत्र भी देखा जाता है। ऐसे में परीक्षा देने जाने से पहले अपना एक पहचान पत्र भी रख लें। यह आपका मतदान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड हो सकता है।
3. एग्जाम सेंटर में मोबाइल फोन ना लेकर जाएं। परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन का इस्तेमाल वर्जित है।
4. घर से समय से निकलें- परीक्षा केंद्र पर जाने से पहले इस बात का विशेष खास ख्याल रखें कि घर से समय से निकलें। ताकि आप समय से परीक्षा केंद्र पर पहुंच सकें। 
5. ट्रैफिक वाले रूट्स से बचें- परीक्षा केंद्र पर घर से जाने के लिए ट्रैफिक वाले रूट्स पकड़ने से बचें। कोशिश ये भी करें कि परीक्षा केंद्र पर थोड़ी देर पहले पहुंचें।
की परीक्षा सिटी, डेट, शिफ्ट की सूचना जारी की गई है जिनकी परीक्षाएं 17 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच तय की गई है। यानी 16 अक्टूबर के बाद जिन उम्मीदवारों की परीक्षा होगी, उनकी सही परीक्षा तिथि, शहर व शिफ्ट की सूचना आज दी जाएगी।
परीक्षा 90 मिनट यानि डेढ़ घंटे की होगी। दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए यह परीक्षा 120 मिनट की होगी। इस परीक्षा में 100 प्रश्न पूछे जाएंगे। उम्मीदवारों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि इस परीक्षा में निगेटिव मार्किंग भी है। तीन गलत उत्तर देने पर एक अंक काट लिए जाएंगे। दूसरी सबसे अहम बात है यह कि उम्मीदवारों को अपना असल पहचान पत्र लेकर जाना होगा। क्योंकि फोटोकॉपी वाले पहचान पत्र मान्य नहीं होंगे।
ਜੰਮੂ-ਕਸ਼ਮੀਰ ਦੇ ਕਿਸ਼ਤਵਾੜ ਚ ਵੱਡਾ ਹਾਦਸਾ ਹੋਣ ਦੀ ਖ਼ਬਰ ਹੈ। ਕਿਸ਼ਤਵਾੜ ਚ ਇੱਕ ਬੱਸ ਚਿਨਾਬ ਨਦੀ ਚ ਡਿੱਗ ਗਈ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਬੱਸ ਚ ਸਵਾਰ ਘੱਟੋ ਘੱਟ 13 ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਮੌਤ ਹੋ ਗਈ ਜਦਕਿ ਕਈ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਜਖ਼ਮੀ ਹੋਣ ਦੀ ਖਬਰ ਹੈ। ਘਟਨਾ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਮਿਲਦਿਆਂ ਹੀ ਪੁਲਿਸ ਅਤੇ ਫ਼ੌਜੀ ਟੀਮ ਪੁੱਜੀ ਅਤੇ ਪੀੜਤਾਂ ਨੂੰ ਕੱਢਣ ਦਾ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤਾ।

ਦੱਸਣਯੋਗ ਹੈ ਕਿ ਬੱਸ ਚ 30 ਤੋਂ ਜਿ਼ਆਦਾ ਯਾਤਰੀ ਸਵਾਰ ਸਨ। ਸਥਾਨਕ ਪੁਲਿਸ ਅਤੇ ਭਾਰਤੀ ਫ਼ੌਜ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਪੀੜਤਾਂ ਨੂੰ ਨਿਜੀ ਹਸਪਤਾਲ ਚ ਭਰਤੀ ਕਰਵਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ ਜਦਕਿ ਹਾਦਸੇ ਚ ਮ੍ਰਿਤਕਾਂ ਦੀਆਂ ਲਾਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਪੋਸਟਮਾਰਟਮ ਲਈ ਭੇਜਿਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ।ਮੂ-ਕਸ਼ਮੀਰ ਦੇ ਕਿਸ਼ਤਵਾੜ ਚ ਵੱਡਾ ਹਾਦਸਾ ਹੋਣ ਦੀ ਖ਼ਬਰ ਹੈ। ਕਿਸ਼ਤਵਾੜ ਚ ਇੱਕ ਬੱਸ ਚਿਨਾਬ ਨਦੀ ਚ ਡਿੱਗ ਗਈ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਬੱਸ ਚ ਸਵਾਰ ਘੱਟੋ ਘੱਟ 13 ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਮੌਤ ਹੋ ਗਈ ਜਦਕਿ ਕਈ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਜਖ਼ਮੀ ਹੋਣ ਦੀ ਖਬਰ ਹੈ। ਘਟਨਾ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਮਿਲਦਿਆਂ ਹੀ ਪੁਲਿਸ ਅਤੇ ਫ਼ੌਜੀ ਟੀਮ ਪੁੱਜੀ ਅਤੇ ਪੀੜਤਾਂ ਨੂੰ ਕੱਢਣ ਦਾ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤਾ।

ਦੱਸਣਯੋਗ ਹੈ ਕਿ ਬੱਸ ਚ 30 ਤੋਂ ਜਿ਼ਆਦਾ ਯਾਤਰੀ ਸਵਾਰ ਸਨ। ਸਥਾਨਕ ਪੁਲਿਸ ਅਤੇ ਭਾਰਤੀ ਫ਼ੌਜ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਪੀੜਤਾਂ ਨੂੰ ਨਿਜੀ ਹਸਪਤਾਲ ਚ ਭਰਤੀ ਕਰਵਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ ਜਦਕਿ ਹਾਦਸੇ ਚ ਮ੍ਰਿਤਕਾਂ ਦੀਆਂ ਲਾਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਪੋਸਟਮਾਰਟਮ ਲਈ ਭੇਜਿਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈਹਰਿਆਣਾ ਦੇ ਮਹਿੰਦਰਗੜ੍ਹ ਜ਼ਿਲ੍ਹੇ 'ਚ 19 ਸਾਲਾਂ ਲੜਕੀ ਨੂੰ ਕਥਿਤ ਤੋਰ ਤੇ ਅਗਵਾ ਕਰਕੇ ਉਸ ਨਾਲ ਸਮੂਹਿਕ ਬਲਾਤਕਾਰ ਕਰਨ ਦਾ ਮਾਮਲਾ ਸਾਹਮਣੇ ਆਇਆ ਹੈ। ਇਸ ਮਾਮਲੇ 'ਚ 3 ਲੋਕਾਂ 'ਤੇ ਸਮੂਹਿਕ ਬਲਾਤਕਾਰ ਕਰਨ ਦਾ ਦੋਸ਼ ਹੈ।

Tuesday, September 4, 2018

岛国们呼吁切勿拖延气候协议

四,联合国年度气候大会的倒数第二天,协议谈判在各会议室相继中断,尽管世界各地的科学家们都警告采取更有力行动对抗气候变化的窗口正在迅速关闭。小岛屿国家呼吁采取更有力的行动,以免自己的国家会因为海平面上升而全部淹没。
 
来自194个国家的政治家和官员齐聚南非德班,参加为时两周的联合国气候变化框架公约( )峰会,媒体对此报道不绝于耳。然而,峰会在决定谁为控制森林砍伐埋单及如何控制的规定上仍然无法达成协议,联合国执行计划主任阿希姆•施泰纳(  )说道:“你想让热带国家的森林拯救世界。那么你就必须为其买单。”
 
除了富国和穷国之间对减少温室气体排放的这个重大问题争执不下以外,对由谁管理绿色气候基金( )也存在严重分歧,绿色气候基金是用来资助最贫困国家资金以应对气候变化影响。美国和少数其他国家希望管理权在世界银行的全球环境资金手中,但大多数发展中国家希望由 管理。显然,在任何国家往基金中投入资金之前必须作出决定。正如国际非政府组织美国环保协会的里奇•阿乌哈( )指出的那样:“除非已经建立了银行,否则你没办法把钱放入银行。”但是无法达成一致意味着更长的拖延。
 
 还要面临更多严重的问题。石油出口国家,主要代表是沙特阿拉伯,一直在说如果气候谈判减少了全世界的石油销售,他们必须从 中获得赔偿。绝大多数的其他发展中国家则强烈反对这个观点,且暂时没有解决方案。
 
正当代表团们对此问题和很多其他问题展开口舌之战时,格林纳达外交部长兼小岛屿国家联盟主席卡罗尔•胡德(  )称:“这些谈判没有给予足够的重视。如果我们认为温室气体排放正在导致全球变暖,我们为何不现在就制定减排目标呢?”
 
胡德先生说等到2020年才同意全球协议将是一场灾难。年度峰会被称为COP(缔约方会议),胡德先生问:“这是COP(警察)还是corpse(尸体)呢?我们希望到那天结束时,不用把殡葬人员喊来。”