Thursday, November 29, 2018

براءة 3 متهمين من غسل أموال متحصلة من جرائم .. وتغريمهم عن تهمة جمع

برأت المحكمة الكبرى الجنائية الأولى 3 متهمين بغسل أموال متحصلة من جرائم، فيما غرمت كل متهم مبلغ 500 دينار عن جمع أموال من دون ترخيص وإرسالها إلى مؤسسة تحمل اسم «الصادق الأمين» بتنزانيا، بإدارة المتهم الثالث الهارب في إيران، وأمرت المحكمة بمصادرة المبالغ المضبوطة لدى المتهمين الأول والثاني.
وكانت النيابة العامة أسندت للمتهمين الثلاثة أنهم في غضون عام 2013 – 2017. المتهمان الأول والثاني، تلقيا واحتفظا بعائد جريمة وأخفيا مصدره وأجريا عليه عمليات تحويل ونقل مع علمهما بأنها متحصلة من نشاط إجرامي، بأن قاما بجمع أموال بلغ قدرها 33041 دينار من دون ترخيص، وإجراء عمليات تحويل ونقلها الى جهة خارجية وهي مؤسسة الصادق الأمين بجمهورية تنزانيا الاتحادية عن طريق شركات الصرافة والنقل عبر الحدود، وذلك بعد أن تلقيا تلك الأموال من أشخاص قاموا بدفعها لهما واحتفظا بها ثم أخفيا طبيعتها ومصدرها وطريقة تصرفهما فيها وحركتها، ثم قاما بتحويلها وإرسالها لتلك الجهة على دفعات لإخفاء مصدرها مع علمهما بأنها متحصلة من نشاط إجرامي.
كما جمعا أموالا بغير الأغراض العامة وبدون ترخيص من الجهات المختصة بأن جمعا أموالا من عدد من الأشخاص وبدون الحصول على ترخيص من الجهة المعنية.
وأسندت إلى المتهم الثالث أنه اشترك بطريقي الاتفاق والمساعدة مع الأول والثاني في ارتكاب الجريمتين موضوع التهمتين السابقتين بأن قام بإرسال أرقام التواصل معهما عبر وسائل التواصل الاجتماعي، وبين من خلال تلك الرسائل أنهما يتوليان مسؤولية جمع الأموال للمؤسسة واتفق معهما وساعدهما في إخفاء مصدر تلك المبالغ وإجراء عملية تحويل ونقل لها، فتمت الجريمة بناء على هذا الاتفاق وتلك المساعدة.
ودفع المحامي عبدالرحمن غنيم وكيل المتهم الأول ببراءته من جريمة غسل الأموال لانتفاء أركانها في حقه، وقال إن غسل الأموال مرتبط إلى حد كبير بأنشطة غير مشروعة عادة ما تكون هاربة خارج حدود سريان القوانين المناهضة للفساد المالي، ثم محاولة العودة بها مرة أخرى بصفة شرعية معترف بها من قبل نفس القوانين التي كانت تجرمها مثل الأموال المتحصلة من جرائم المخدرات والسلاح والإرهاب والاتجار في البشر، بينما سلوك المتهم المتمثل في جمع التبرعات لأغراض خيرية لا يتوافر به محل الركن المادي لجريمة غسل الأموال، والذى يستلزم أن يكون مصدر المال غير مشروع بالوقوف على تجريم الفعل الذى تأتى به الحصول على المال ابتداء، لافتا إلى عدم ثبوت مساهمة موكله أى عمل غير مشروع أو إرهابي.
وقالت المحكمة إنها تطمئن للأدلة التي ساقتها النيابة بشأن جمع المتهمين أموالا من دون ترخيص واعترافاتهم بها، ولا ينال من ذلك ما دفع به الدفاع بجهل المتهمين بالقانون، وخاصة أن القوانين الجزائية لا يعتد فيها بالجهل بالقانون.
وحول براءة المتهمين من تهمة غسل الأموال، قالت المحكمة إن جريمة غسل الأموال تقوم إذا ما قام فاعلها بإجراء عمليات مالية تتعلق بعائد جريمة أو ما يعتقد أنها متحصلة من نشاط إجرامي، ولتوافر القصد الجنائي العام يجب توافر القصد الخاص المتمثل في الإخفاء أو التمويه لطبيعة أو مصدر الأموال، وكان المتهمون لم يقصدوا إخفاء الأموال التي تم تجميعها من الراغبين في التبرع وإرسالها لمناطق أشد احتياجا فقام المتهمان الأول والثاني بتحويلها الى جمعية خيرية بتنزانيا بإيعاز من الثالث، ولم يحصلوا على منفعة شخصية من ذلك النشاط، وإنما قصدوا من ذلك نيل المثوبة من الله، الأمر الذي تقضي معه المحكمة بالبراءة من تهمة غسل الأموال.

Sunday, November 11, 2018

मोदी सरकार की सफाई, नहीं मांगे आरबीआई के रिजर्व से 3.6 लाख करोड़

रिजर्व बैंक और मोदी सरकार के बीच जारी खींचतान के बीच केन्द्र सरकार ने सफाई दी है कि उसकी नजर आरबीआई के रिजर्व खजाने पर नहीं है. केन्द्र सरकार की तरफ से डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स सचिव एस सी गर्ग ने कहा कि केन्द्र सरकार ने रिजर्व बैंक से 3.6 लाख करोड़ रुपये लेने की पेशकश नहीं की है.
गर्ग ने दावा किया कि केन्द्र सरकार ने रिजर्व बैंक के इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क को दुरुस्त करने के तरीकों को इजात करने की पहल की है. इसके साथ ही केन्द्र सरकार की वित्तीय स्थिति को मजबूत करार देते हुए गर्ग ने कहा कि मीडिया में आरबीआई के रिजर्व खजाने पर सरकार की नजर को लेकर दुष्प्रचार किया जा रहा है. गर्ग ने दावा किया कि चालू वित्त वर्ष के अंत में (मार्च 2019) में केन्द्र सरकार अपना वित्तीय घाटा 3.3 फीसदी पर सीमित रखने में सफल होगी.     
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक केन्द्र सरकार 19 नवंबर को होने आरबीआई बोर्ड बैठक में अपना अहम एजेंडा सामने करते हुए बोर्ड में रिजर्व बैंक गवर्नर की भूमिका को कम करने का काम कर सकती है. दरअसल, खबर के मुताबिक केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक गवर्नर के बीच विवाद की अहम वजह केन्द्रीय रिजर्व बैंक के पास मौजूद 9.6 ट्रिलियन (9.6 लाख करोड़) रुपये की रकम है.
एक प्रमुख अखबार ने सूत्रों के हवाले से दावा किया था कि केन्द्र सरकार रिजर्व बैंक के पास पड़ी इस रिजर्व मुद्रा का लगभग एक-तिहाई हिस्सा लेना चाहती है. केन्द्र सरकार का रुख है कि इतनी बड़ी मात्रा में रिजर्व मुद्रा रखना रिजर्व बैंक की पुरानी और संकुचित धारणा है और इसे बदलने की जरूरत है. खबर के मुताबिक केन्द्र सरकार रिजर्व बैंक से चाहती है कि उसे इस रिजर्व मुद्रा से 3.6 ट्रिलियन रुपये दिए जाएं. केन्द्र सरकार इस मुद्रा का संचार कर्ज और अन्य विकास कार्यों पर खर्च के जरिए अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहती है.
गौरतलब है कि इंडिया टुडे कि रिपोर्ट के मुताबिक 19 नवंबर को होने वाली आरबीआई बोर्ड की प्रमुख बैठक में केन्द्र सरकार अपने नुमाइंदों के जरिए विवादित विषयों पर प्रस्ताव के सहारे फैसला करने का दबाव बना सकती है. दरअसल, रिजर्व बैंक बोर्ड में केन्द्र सरकार के प्रतिनिधियों की संख्या अधिक है लिहाजा फैसला प्रस्ताव के आधार पर लिया जाएगा तो रिजर्व बैंक गवर्नर के सामने केन्द्र सरकार का सभी फैसला मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा.रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी का ऐलान कर 1000 और 500 रुपये की करेंसी को प्रतिबंधित कर दिया. ऐलान के साथ ही दावा किया कि इस कदम से कालेधन पर लगाम लगेगी और नकली करेंसी को पकड़ने में मदद मिलेगी. मोदी सरकार के इस फैसले को केन्द्रीय रिजर्व बैंक ने ऐलान से महज 4 घंटे पहले मंजूरी दी थी. हालांकि, इस मंजूरी के साथ केन्द्रीय बैंक ने सरकार के दोनों बड़े दावों की लिखित बयान में हवा भी निकाल दी थी.
केन्द्रीय रिजर्व बैंक की 561वीं बैठक आनन-फानन में 8 नवंबर 2016 को शाम 5.30 पर बुलाई गई. इस बैठक में केन्द्रीय बैंक के डायरेक्टर्स ने नोटबंदी के फैसले को सरकार का एक साहसी कदम बताया. लेकिन केन्द्रीय बैंक ने चेतावनी भी दे दी कि नोटबंदी से उक्त वित्त वर्ष की जीडीपी पर नकारात्मक असर पड़ेगा.
रिजर्व बैंक बोर्ड की इस बैठक के मिनट्स पर रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल ने 5 हफ्ते बाद 15 दिसंबर,2016 को साइन किया. आरबीआई बोर्ड की मुलाकात के इन मिनट्स में बैंक ने 6 अहम आपत्तियों को शामिल किया. गौरतलब है कि मिनट के मुताबिक 7 नवंबर 2016 को वित्त मंत्रालय से नोटबंदी का प्रस्ताव पाने के बाद आऱबीआई डायरेक्टर की पहली आपत्ति सरकार की उस दलील पर थी जिसमें दावा किया गया कि नोटबंदी लागू करने से देश में कालेधन पर लगाम लगने के साथ नकली करेंसी को भी संचार से रोकने में मदद मिलेगी.
आरबीआई बोर्ड ने अपनी बैठक के मिनट्स में सरकार की उन सभी दलीलों को शामिल किया जो उसने नोटबंदी का फैसला लेने के लिए दी थी. सरकार की दलील पर बोर्ड बैठक ने अपना पक्ष रखा कि देश में अधिकांश कालाधन कैश की जगह रियल एस्टेट और सोने के तौर पर पड़ा है. लिहाजा, नोटबंदी से कालेधन के बड़े हिस्से पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
वहीं नकली करेंसी के दावे पर केन्द्रीय बैंक बोर्ड ने कहा कि देश में कुल नकली करेंसी का अनुमान महज 400 करोड़ रुपये का है ऐसे में नोटबंदी जैसे फैसले से इसे पकड़ने का फायदा भी नगण्य होगा.

Friday, September 28, 2018

पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है श्राद्ध

पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धा का प्रतीक है। पितरों के निमित्त विधिपूर्वक जो कर्म श्रद्धा से किया जाता है, उसी को श्राद्ध कहते हैं। ब्रह्म पुराण के अनुसार श्राद्ध की परिभाषा है, जो कुछ उचित काल, पात्र एवं स्थान के अनुसार उचित (शास्त्रानुमोदित) विधि द्वारा पितरों को लक्ष्य करके श्रद्धापूर्वक ब्राह्मणों को दिया जाता है, श्राद्ध कहलाता है। हिंदू धर्म के अनुसार, प्रत्येक शुभ कार्य के प्रारंभ में माता-पिता, पूर्वजों को नमस्कार या प्रणाम करना हमारा कर्त्तव्य है, हमारे पूर्वजों की वंश परंपरा के कारण ही हम आज यह जीवन देख रहे हैं, इस जीवन का आनंद प्राप्त कर रहे हैं। इस धर्म में, ऋषियों ने वर्ष में एक पक्ष को पितृपक्ष का नाम दिया, जिस पक्ष में हम अपने पितरेश्वरों का श्राद्ध, तर्पण, मुक्ति हेतु विशेष क्रिया संपन्न कर उन्हें अर्घ्य समर्पित करते हैं। यदि किसी कारण से उनकी आत्मा को मुक्ति प्रदान नहीं हुई है तो हम उनकी शांति के लिए विशिष्ट कर्म करते हैं, जिसे श्राद्ध कहते हैं।
श्राद्ध-कर्म में पके हुए चावल, दूध और तिल को मिश्रित करके पिंड बनाते हैं, उसे सपिंडीकरण कहते हैं। पिंड का अर्थ है शरीर। यह एक पारंपरिक विश्वास है, जिसे विज्ञान भी मानता है कि हर पीढ़ी के भीतर मातृकुल तथा पितृकुल दोनों में पहले की पीढि़यों के समन्वित गुणसूत्र उपस्थित होते हैं। चावल के पिंड जो पिता, दादा, परदादा और पितामह के शरीरों का प्रतीक हैं, आपस में मिलकर फिर अलग बांटते हैं। यह प्रतीकात्मक अनुष्ठान जिन जिन लोगों के गुणसूत्र (जीन्स) श्राद्ध करने वाले की अपनी देह में हैं, उनकी तृप्ति के लिए होता है।
दैनिक पंच यज्ञों में पितृ यज्ञ को खास बताया गया है। इसमें तर्पण और समय-समय पर पिंडदान भी सम्मिलित है। पूरे पितृपक्ष भर तर्पण आदि करना चाहिए। इस दौरान कोई अन्य शुभ कार्य या नया कार्य अथवा पूजा-पाठ अनुष्ठान संबंधी नया काम नहीं किया जाता। साथ ही श्राद्ध नियमों का विशेष पालन करना चाहिए। परंतु नित्य कर्म तथा देवताओं की नित्य पूजा जो पहले से होती आ रही है, उसको बंद नहीं करना चाहिए।
जन्म एवं मृत्यु का रहस्य अत्यंत गूढ़ है। वेदों में, दर्शन शास्त्रों में, उपनिषदों एवं पुराणों आदि में हमारे ऋषियों-मनीषियों ने इस विषय पर विस्तृत विचार किया है। श्रीमद्भागवत में भी स्पष्ट रूप से बताया गया है कि जन्म लेने वाले की मृत्यु और मृत्यु को प्राप्त होने वाले का जन्म निश्चित है। यह प्रकृति का नियम है। शरीर नष्ट होता है मगर आत्मा कभी भी नष्ट नहीं होती है। वह पुनः जन्म लेती है और बार-बार जन्म लेती है। इस पुनः जन्म के आधार पर ही कर्मकांड में श्राद्धदि कर्म का विधान निर्मित किया गया है। अपने पूर्वजों के निमित्त दी गई वस्तुएं सचमुच उन्हें प्राप्त होती हैं या नहीं, इस विषय में अधिकांश लोगों को संदेह है। हमारे पूर्वज अपने कर्मानुसार किस योनि में उत्पन्न हुए हैं, जब हमें इतना ही नहीं मालूम तो फिर उनके लिए दिए गए पदार्थ उन तक कैसे पहुंच सकते हैं? क्या एक ब्राह्मण को भोजन कराने से हमारे पूर्वजों का पेट भर सकता है? न जाने इस तरह के कितने ही सवाल लोगों के मन में उठते होंगे। वैसे इन प्रश्नों का सीधे-सीधे उत्तर देना संभव भी नहीं है, क्योंकि वैज्ञानिक मापदंडों को इस सृष्टि की प्रत्येक विषयवस्तु पर लागू नहीं किया जा सकता। दुनिया में ऐसी कई बातें हैं, जिनका कोई प्रमाण न मिलते हुए भी उन पर विश्वास करना पड़ता है।
श्राद्ध दिवस से पूर्व दिवस को बुद्धिमान पुरुष श्रोत्रिय आदि से विहित ब्राह्मणों को पितृ-श्राद्ध तथा वैश्व-देव-श्राद्ध के लिए निमंत्रित करें। पितृ-श्राद्ध के लिए सामर्थ्यानुसार अयुग्म तथा वैश्व-देव-श्राद्ध के लिए युग्म ब्राह्मणों को निमंत्रित करना चाहिए। निमंत्रित तथा निमंत्रक क्रोध, स्त्रीगमन तथा परिश्रम आदि से दूर रहे।
पितृ का अर्थ
पितृ का अर्थ है पिता, किंतु पितर शब्द जो दो अर्थों में प्रयुक्त हुआ है ः व्यक्ति के आगे के तीन मृत पूर्वज, मानव जाति के प्रारंभ या प्राचीन पूर्वज जो एक पृथक लोक के अधिवासी के रूप में कल्पित हैं।
तर्पण
आवाहन, पूजन, नमस्कार के उपरांत तर्पण किया जाता है। जल में दूध, जौ, चावल, चंदन डाल कर तर्पण कार्य में प्रयुक्त करते हैं। मिल सके तो गंगा जल भी डाल देना चाहिए। तृप्ति के लिए तर्पण किया जाता है। स्वर्गस्थ आत्माओं की तृप्ति किसी पदार्थ से, खाने-पहनने आदि की वस्तु से नहीं होती, क्योंकि स्थूल शरीर के लिए ही भौतिक उपकरणों की आवश्यकता पड़ती है। मरने के बाद स्थूल शरीर समाप्त होकर, केवल सूक्ष्म शरीर ही रह जाता है। सूक्ष्म शरीर को भूख-प्यास, सर्दी-गर्मी आदि की आवश्यकता नहीं रहती, उसकी तृप्ति का विषय कोई खाद्य पदार्थ या हाड़-मांस वाले शरीर के लिए उपयुक्त उपकरण नहीं हो सकते। सूक्ष्म शरीर में विचारणा, चेतना और भावना की प्रधानता रहती है, इसलिए उसमें उत्कृष्ट भावनाओं से बना अंतःकरण या वातावरण ही शांतिदायक होता है।

Friday, September 14, 2018

रेलवे ग्रुप डी परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी, यूं करें डाउनलोड

लवे ग्रुप डी के जिन उम्मीदवारों की परीक्षा 17 सितंबर को है, उनके एडमिट कार्ड जारी कर दिए गए हैं। रेलवे ने घोषणा की थी कि परीक्षा तिथि से चार दिन पहले एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। इससे पहले रेलवे ने एसएसी/एसटी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए ट्रेवल अथॉरिटी भी जारी कर दी। साथ ही सभी उम्मीदवारों के लिए मॉक लिंक भी एक्टिवेट कर दिया ताकि कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (सीबीटी) की प्रैक्टिस की जा सके, उसे समझा जा सके।
इसके अलावा आज उन शेष उम्मीदवारों की परीक्षा तिथि, शहर व शिफ्ट की भी घोषणा की जाएगी जिनकी 09 सितंबर को नहीं की गई थी। 09 सितंबर को सिर्फ उन अभ्यर्थियों  परीक्षा के लिए जानें से पहले एडमिट कार्ड ले जाना न भूलें। एडमिट कार्ड देखकर ही आपको परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया जाएगा।
2. पहचान पत्र- कई बार एग्जाम सेंटर पर आपका पहचान पत्र भी देखा जाता है। ऐसे में परीक्षा देने जाने से पहले अपना एक पहचान पत्र भी रख लें। यह आपका मतदान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, आधार कार्ड हो सकता है।
3. एग्जाम सेंटर में मोबाइल फोन ना लेकर जाएं। परीक्षा केंद्रों पर मोबाइल फोन का इस्तेमाल वर्जित है।
4. घर से समय से निकलें- परीक्षा केंद्र पर जाने से पहले इस बात का विशेष खास ख्याल रखें कि घर से समय से निकलें। ताकि आप समय से परीक्षा केंद्र पर पहुंच सकें। 
5. ट्रैफिक वाले रूट्स से बचें- परीक्षा केंद्र पर घर से जाने के लिए ट्रैफिक वाले रूट्स पकड़ने से बचें। कोशिश ये भी करें कि परीक्षा केंद्र पर थोड़ी देर पहले पहुंचें।
की परीक्षा सिटी, डेट, शिफ्ट की सूचना जारी की गई है जिनकी परीक्षाएं 17 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच तय की गई है। यानी 16 अक्टूबर के बाद जिन उम्मीदवारों की परीक्षा होगी, उनकी सही परीक्षा तिथि, शहर व शिफ्ट की सूचना आज दी जाएगी।
परीक्षा 90 मिनट यानि डेढ़ घंटे की होगी। दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए यह परीक्षा 120 मिनट की होगी। इस परीक्षा में 100 प्रश्न पूछे जाएंगे। उम्मीदवारों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि इस परीक्षा में निगेटिव मार्किंग भी है। तीन गलत उत्तर देने पर एक अंक काट लिए जाएंगे। दूसरी सबसे अहम बात है यह कि उम्मीदवारों को अपना असल पहचान पत्र लेकर जाना होगा। क्योंकि फोटोकॉपी वाले पहचान पत्र मान्य नहीं होंगे।
ਜੰਮੂ-ਕਸ਼ਮੀਰ ਦੇ ਕਿਸ਼ਤਵਾੜ ਚ ਵੱਡਾ ਹਾਦਸਾ ਹੋਣ ਦੀ ਖ਼ਬਰ ਹੈ। ਕਿਸ਼ਤਵਾੜ ਚ ਇੱਕ ਬੱਸ ਚਿਨਾਬ ਨਦੀ ਚ ਡਿੱਗ ਗਈ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਬੱਸ ਚ ਸਵਾਰ ਘੱਟੋ ਘੱਟ 13 ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਮੌਤ ਹੋ ਗਈ ਜਦਕਿ ਕਈ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਜਖ਼ਮੀ ਹੋਣ ਦੀ ਖਬਰ ਹੈ। ਘਟਨਾ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਮਿਲਦਿਆਂ ਹੀ ਪੁਲਿਸ ਅਤੇ ਫ਼ੌਜੀ ਟੀਮ ਪੁੱਜੀ ਅਤੇ ਪੀੜਤਾਂ ਨੂੰ ਕੱਢਣ ਦਾ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤਾ।

ਦੱਸਣਯੋਗ ਹੈ ਕਿ ਬੱਸ ਚ 30 ਤੋਂ ਜਿ਼ਆਦਾ ਯਾਤਰੀ ਸਵਾਰ ਸਨ। ਸਥਾਨਕ ਪੁਲਿਸ ਅਤੇ ਭਾਰਤੀ ਫ਼ੌਜ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਪੀੜਤਾਂ ਨੂੰ ਨਿਜੀ ਹਸਪਤਾਲ ਚ ਭਰਤੀ ਕਰਵਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ ਜਦਕਿ ਹਾਦਸੇ ਚ ਮ੍ਰਿਤਕਾਂ ਦੀਆਂ ਲਾਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਪੋਸਟਮਾਰਟਮ ਲਈ ਭੇਜਿਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ।ਮੂ-ਕਸ਼ਮੀਰ ਦੇ ਕਿਸ਼ਤਵਾੜ ਚ ਵੱਡਾ ਹਾਦਸਾ ਹੋਣ ਦੀ ਖ਼ਬਰ ਹੈ। ਕਿਸ਼ਤਵਾੜ ਚ ਇੱਕ ਬੱਸ ਚਿਨਾਬ ਨਦੀ ਚ ਡਿੱਗ ਗਈ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਬੱਸ ਚ ਸਵਾਰ ਘੱਟੋ ਘੱਟ 13 ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਮੌਤ ਹੋ ਗਈ ਜਦਕਿ ਕਈ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਜਖ਼ਮੀ ਹੋਣ ਦੀ ਖਬਰ ਹੈ। ਘਟਨਾ ਦੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਮਿਲਦਿਆਂ ਹੀ ਪੁਲਿਸ ਅਤੇ ਫ਼ੌਜੀ ਟੀਮ ਪੁੱਜੀ ਅਤੇ ਪੀੜਤਾਂ ਨੂੰ ਕੱਢਣ ਦਾ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤਾ।

ਦੱਸਣਯੋਗ ਹੈ ਕਿ ਬੱਸ ਚ 30 ਤੋਂ ਜਿ਼ਆਦਾ ਯਾਤਰੀ ਸਵਾਰ ਸਨ। ਸਥਾਨਕ ਪੁਲਿਸ ਅਤੇ ਭਾਰਤੀ ਫ਼ੌਜ ਦੀ ਮਦਦ ਨਾਲ ਪੀੜਤਾਂ ਨੂੰ ਨਿਜੀ ਹਸਪਤਾਲ ਚ ਭਰਤੀ ਕਰਵਾਇਆ ਗਿਆ ਹੈ ਜਦਕਿ ਹਾਦਸੇ ਚ ਮ੍ਰਿਤਕਾਂ ਦੀਆਂ ਲਾਸ਼ਾਂ ਨੂੰ ਪੋਸਟਮਾਰਟਮ ਲਈ ਭੇਜਿਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈਹਰਿਆਣਾ ਦੇ ਮਹਿੰਦਰਗੜ੍ਹ ਜ਼ਿਲ੍ਹੇ 'ਚ 19 ਸਾਲਾਂ ਲੜਕੀ ਨੂੰ ਕਥਿਤ ਤੋਰ ਤੇ ਅਗਵਾ ਕਰਕੇ ਉਸ ਨਾਲ ਸਮੂਹਿਕ ਬਲਾਤਕਾਰ ਕਰਨ ਦਾ ਮਾਮਲਾ ਸਾਹਮਣੇ ਆਇਆ ਹੈ। ਇਸ ਮਾਮਲੇ 'ਚ 3 ਲੋਕਾਂ 'ਤੇ ਸਮੂਹਿਕ ਬਲਾਤਕਾਰ ਕਰਨ ਦਾ ਦੋਸ਼ ਹੈ।

Tuesday, September 4, 2018

岛国们呼吁切勿拖延气候协议

四,联合国年度气候大会的倒数第二天,协议谈判在各会议室相继中断,尽管世界各地的科学家们都警告采取更有力行动对抗气候变化的窗口正在迅速关闭。小岛屿国家呼吁采取更有力的行动,以免自己的国家会因为海平面上升而全部淹没。
 
来自194个国家的政治家和官员齐聚南非德班,参加为时两周的联合国气候变化框架公约( )峰会,媒体对此报道不绝于耳。然而,峰会在决定谁为控制森林砍伐埋单及如何控制的规定上仍然无法达成协议,联合国执行计划主任阿希姆•施泰纳(  )说道:“你想让热带国家的森林拯救世界。那么你就必须为其买单。”
 
除了富国和穷国之间对减少温室气体排放的这个重大问题争执不下以外,对由谁管理绿色气候基金( )也存在严重分歧,绿色气候基金是用来资助最贫困国家资金以应对气候变化影响。美国和少数其他国家希望管理权在世界银行的全球环境资金手中,但大多数发展中国家希望由 管理。显然,在任何国家往基金中投入资金之前必须作出决定。正如国际非政府组织美国环保协会的里奇•阿乌哈( )指出的那样:“除非已经建立了银行,否则你没办法把钱放入银行。”但是无法达成一致意味着更长的拖延。
 
 还要面临更多严重的问题。石油出口国家,主要代表是沙特阿拉伯,一直在说如果气候谈判减少了全世界的石油销售,他们必须从 中获得赔偿。绝大多数的其他发展中国家则强烈反对这个观点,且暂时没有解决方案。
 
正当代表团们对此问题和很多其他问题展开口舌之战时,格林纳达外交部长兼小岛屿国家联盟主席卡罗尔•胡德(  )称:“这些谈判没有给予足够的重视。如果我们认为温室气体排放正在导致全球变暖,我们为何不现在就制定减排目标呢?”
 
胡德先生说等到2020年才同意全球协议将是一场灾难。年度峰会被称为COP(缔约方会议),胡德先生问:“这是COP(警察)还是corpse(尸体)呢?我们希望到那天结束时,不用把殡葬人员喊来。” 
 

Thursday, August 30, 2018

健全动物保护法 缓解食物安全危机

中国决策者正紧锣密鼓地筹划着下一个五年计划。对于中国未来的发展蓝图,人们有着怎样的期待呢?就此,中外对外采访了数位参与者。
 
影响中国政治稳定的主要冲突之一,是其不断扩大的动物保护群体与虐待动物相关产业之间的矛盾。据估计,目前中国犬只数量已达1.3亿。但是,大量的狗却遭到屠杀成为人们餐桌上的食物。例如在广西玉林,狗肉贩子打着“民间美食”的幌子来保护自己的商业利益,从而加剧了这种大规模屠狗的现象。 
 
目前中国还没有肉狗养殖场来供应广东、广西和吉林的狗肉市场。这些市场上的肉狗大多是偷来的宠物狗或农村的看家狗。在山东省济南市的一个郊区村庄,我们采访的农户中有87%表示自家曾经丢过狗。在桂林,两名偷狗贼遭到愤怒的狗主暴打。村民以这种极端的方式来保护自己的权利表明他们对这种行为的深恶痛绝。目前,中国政府正全力维护社会稳定,而这一冲突对社会稳定构成了威胁。 
 
席卷中国的食品安全危机也与动物福利息息相关。例如,中国目前针对狗肉交易还没有建立安全管理规范。市场上的肉狗要么是偷来的,要么就是生病和快死的。姑息这种违法行为不仅导致偷狗盛行,还引发毒狗行为。去年湖南警方在一次打击行动中查获了12吨毒狗肉。台湾和香港已经禁止食用狗肉,中国大陆不应该效仿一下吗? 
 
中国拥有世界上最大的畜牧业。2013年发生的黄浦江死猪漂流事件只是冰山一角。大部分农场死亡牲畜并不会被扔到江河中顺流而下,更不会根据国家法律法规得到妥善的处理,而是有可能变成肉制品供人类消费,或者用于其他可疑的用途。那些集约化养殖过程中存活下来并被送往屠宰场的牲畜可能也同样危险。工业化养殖场管理手段落后,养殖条件恶劣,普遍存在滥用药物的现象。同时,公共卫生危机、污染和气候变化又均与工业化畜牧手段有关。难道这个时候中国还没有想要寻找其他的畜牧养殖模式吗?                                                                                       
 
“十三五”规划不仅会影响中国本身,也会影响整个世界。在全球野生动物保卫战中,中国需要做出更多来证明自己的立场。目前大象偷猎已经达到了前所未有的规模,中国国内合法的象牙销售是维持或刺激象牙需求不断增长的原因之一。中国禁止国内象牙销售将会对全球动物保护做出重大贡献。打击中国公民的跨境偷猎活动也会提高中国的国际声誉。目前,许多中国野生动物交易商为了获取老虎器官、穿山甲、海龟、犀牛角和熊掌深入亚非两洲的森林和水域。这些行为破坏了中国与相关国家间的关系。中国《野生动物保护法》优先保护野生动物的“开发和合理利用”。中国应该对这一法律进行修订,取消这一政策支持。 
 
过去三年,中国一直对一场事故争论不休:一名两岁的小女孩在闹市街道被车撞倒,生命垂危,而18名先后经过的路人却视而不见。人们不禁要问是什么让我们变得如此冷漠。“我一点都不惊讶,”一名动物保护人士说到,“我们的社会有太多的做法使人们冷漠,尤其年轻人,对别人的喜怒哀乐全然不在乎。”
 
虽然政府制定了相关政策,禁止虐待动物园里的动物,但是在中国许多地方,动物表演、活体投食、与拴住的老虎合影等行为仍在上演。在很多食用狗肉的地区,人们会在马路边或餐馆前等公共场所屠狗。一名记者说道:“我女儿每天早晨上学的路上都会不得已目睹到狗被屠杀的情景。”这种做法会让公众也变得残忍。

Tuesday, August 28, 2018

चीफ़ जस्टिस दीपक मिश्र कब-कब चर्चा में रहे?

छत्तीसगढ़ सरकार ने इसे फ़र्ज़ी याचिका बताया है और फ़ैसला अब जस्टिस दीपक मिश्रा, एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच को करना है.
अगर ऐसे होर्डिंग्स एसोसिएशन या वकीलों की कोई संस्था लगवाती तो बहुत सामान्य सी बात होती, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने ऐसा करके ख़ुद जस्टिस दीपक मिश्रा के लिए असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है.
पुरानी कहावत है कि अदालत का काम न्याय करना ही नहीं है बल्कि ये दिखाना भी है कि न्याय किया जा रहा है.
जस्टिस मिश्रा के सामने ऐसे कई मामले हैं जिनपर उन्हें न्याय भी करना है और न्याय होते हुए दिखाना भी है.
जब ऐसे मामलों की गहन सुनवाई चल रही हो तब इस विवाद से जुड़ी बीजेपी और उसकी सरकारों से उम्मीद नहीं की जानी चाहिए कि वो सुनवाई कर रहे न्यायाधीश से दूरी बनाकर चले?
रमन सिंह की सरकार ने जस्टिस दीपक मिश्रा के स्वागत में होर्डिंग्स लगवाकर उनका स्वागत नहीं किया बल्कि न्याय की कुर्सी पर राजनीति की छाया डालने की कोशिश की है.
इमरजेंसी में इंदिरा गाँधी ने न्यायपालिका को सत्ता के लोहे से बने बूट तले दबा दिया था और — चंद अपवादों को छोड़कर — मनमाने फ़ैसले करवाए.
इमरजेंसी को इसीलिए भारतीय जनतंत्र के इतिहास की सियाह तारीख़ के तौर पर देखा जाता है और उस सियाह तारीख़ का दोहराव कोई नहीं चाहता.
इसलिए न्यायमूर्तियों को ही तय करना होगा कि वो न्याय की मूर्तियों को खंडित होने से कैसे बचाएँगे.
पिछले हफ़्ते दो अभूतपूर्व घटनाएँ हुईं जिन्हें आप चाहें तो 'मामूली बात' कहकर ख़ारिज कर सकते हैं, या फिर अगर बारीकी से देखें तो ये घटनाएँ आपको चिंतित कर सकती हैं.
हाल ही में पटना हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए गए जस्टिस मुकेश रसिक भाई शाह ने बीबीसी हिंदी को दिए एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री की तारीफ़ में कहा कि "नरेंद्र मोदी एक मॉडल हैं, वो एक हीरो हैं.
दूसरी घटना छत्तीसगढ़ की है जहाँ राज्य सरकार के जनसंपर्क विभाग ने भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा की तस्वीरों वाली बड़ी बड़ी होर्डिंग्स रायपुर शहर में लगा दीं जिनमें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर पहली बार छत्तीसगढ़ आने के लिए उनका स्वागत किया गया था.
भारत के किसी भी नागरिक को, चाहे वो न्यायाधीश ही क्यों न हो, किसी की तारीफ़ या आलोचना करने का संवैधानिक अधिकार है.
देश के नागरिक और वोटर की हैसियत से जज़ भी किसी न किसी राजनीतिक पार्टी के काम या विचारधारा से सहमत होकर उसे वोट देते हैं.
जनता की नज़रों में न्याय करने वाला सत्ता से ऊपर भले ही न हो पर आज़ाद ज़रूर होना चाहिए.
तभी न्याय की व्यवस्था में जनता का भरोसा बना रह सकता है.
जब तक ये भरोसा बना रहता है तब तक जनता न्याय की तलाश में पुलिस-प्रशासन और नौकरशाही के ज़रिए अदालत तक जाती है.
जहाँ ये भरोसा दरकने लगता है लोग अपने अपने तरीक़े और नज़रिए से ख़ुद ही "न्याय" करने लग जाते हैं.
दुनिया के कई देशों में इसी तरह से अराजकता फैली है और वहाँ अदालतें नहीं बल्कि विजिलांती संगठन, मिलिशिया और अपराधियों के गिरोह फ़ैसला करते हैं.
ज़्यादातर मामलों में दुश्मन के ख़िलाफ़ ये फ़ैसले सड़क पर ही किए जाते हैं.
ये बात जस्टिस मुकेश रसिक भाई शाह ही बेहतर जानते हैं कि जब वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "हीरो और मॉडल" बता रहे थे तो क्या ये उन्होंने ये राय एक आम नागरिक की हैसियत से दी थी या पटना हाईकोर्ट के चीफ़ जस्टिस के तौर पर.
और क्या उनकी राय में मोदी उनके अपने मॉडल और हीरो हैं या वो ये बात पूरे देश के लोगों की ओर से कह रहे थे?
जस्टिस शाह चाहते तो कह सकते थे कि लोगों की राय पर मेरा कोई नियंत्रण नहीं है और सबको अपनी बात कहने का हक़ है.
लेकिन उन्होंने जवाब में मोदी के बारे में अपनी राय स्पष्ट शब्दों में प्रकट की और कहा, "क्योंकि नरेंद्र मोदी एक मॉडल हैं, वो एक हीरो हैं."
सरकारें क्यों नहीं चाहेंगी कि न्यायाधीश उनकी तरफ़दारी करें? सरकारें और सत्तारूढ़ पार्टियाँ क्यों नहीं चाहेंगी कि क़ानून के हाथ जब उनके किसी बड़े नेता तक पहुँचने वाले हों तभी कोई अदृश्य शक्ति इस हाथ को पीछे खींच ले?
सरकारें क्यों नहीं चाहेंगी कि उनके हर सफ़ेद-सियाह पर अदालतें अपनी मुहर लगाएँ ताकि उनको सबकुछ करने की छूट मिल जाए, जैसा कि इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गाँधी ने चाहा और करवाया?
सरकारें क्यों नहीं चाहेंगी कि देश के हर नागरिक की आँखों की पुतलियों की तस्वीरें, अँगुलियों के निशान, फ़ोन नंबर, बैंक खाते, मकान-दुकान, पत्नी-बच्चे, माता-पिता, चाचा-ताऊ-बिरादर और रिश्तेदारों की सब जानकारियाँ उसकी मुट्ठी में हो?
सरकारें ज़रूर जानना चाहेंगी कि आप क्या खाते हैं, कहाँ जाते हैं, किससे मिलते हैं, कौन से कपड़े पहनना पसंद करते हैं, इंटरनेट पर कितना समय और क्या देखने में बिताते हैं, किस पार्टी को अच्छा और किसे बुरा समझते हैं, ट्रेड यूनियन को नेतागिरी मानकर ख़ारिज करते हैं या इसे कामगारों का बुनियादी अधिकार मानते हैं.
सरकारों की ऐसी ही कई असंवैधानिक मनमानियों पर अंकुश लगाने का काम न्यायाधीशों का है. पर अगर न्यायाधीश सरकार चलाने वालों को "हीरो और मॉडल" कहने लगे तो इसे उनकी सहानुभूतियों के संकेत की तरह देखा जा सकता है और न्याय की कुरसी पर बैठे व्यक्ति के बारे में इस आधार पर ग़लत-सही धारणाएँ बना ली जा सकती हैं.
"

Friday, August 17, 2018

太阳能飞机给世界带来了什么?

迪拜海湾标准时间凌晨四点左右,首架完成环球飞行的太阳能动力飞机——“太阳动力2号”在连续飞行48小时之后,降落在阿布扎比机场。随着这一壮举的完成,我们对于可再生能源极限的认知发生了巨大变化。

​这架飞机于去年3月从纽约起飞,目标就是成为首架环航世界的零燃料飞机,而这一目标花了16个月才完成。这架单座飞机的翼展与波音747相当,其建造目的不是运送乘客,而是传播关于清洁能源利用的信息。

瑞士人伯特兰德·皮卡德和安德烈·博施伯格既是这一项目的创始人,也是实施者。在超过4万公里的飞行(分为17个航段)中,他们轮流驾驶,没有使用一滴燃料。

不过,这次史诗性的旅程也并非一帆风顺。去年上半年,他们因为横风在中国耽搁了好几周,又因为在飞越太平洋时电池过热而被迫在夏威夷的一座飞机库里度过了整个冬天。


在降落后,伯特兰德·皮卡德(一位精神病医生兼热气球玩家)就此次旅程的意义发表了自己的感想。

他说:“我希望人们能够认识到这不仅是飞行史上的首次,也开创了能源史的先河。我确信,未来十年中肯定能看到载有50名乘客的电动飞机进行中短途飞行。”


如今“太阳动力号”已经落地,零排放航空的梦想已经成为现实,人们都在问:究竟什么时候首架商业航班能够起飞,哪个国家会提供这一技术?但是,这些“天外神游”的想法已经掩盖了本次环球飞行所带来的更直接的好处,比如太阳能技术在住宅、办公室和工厂的应用。

“我们用[在飞机上]的所有清洁技术都可以普遍推广……如今这些技术可以让世界更加美好,我们必须利用它们,不仅是为了环境,也因为它们有利可图,还可以创造就业。”皮卡德在
接受《卫报》采访时如是说。

这架飞机的轻体材料和其他部件都能被用于修路,比如为高速公路和其他轻体建筑物提供新型的地面绝缘材料。为飞机的24小时电动引擎提供动力的能效技术则可用于汽车制造。而可以让飞机在夜间飞行的能量密集的锂聚合物电池 可以改变我们存储电力的方式。

丹·卢瑟福是国际清洁运输委员会( )海空技术项目的主管。他说,本次环球飞行最大的收获之一就是用电力系统取代液压内燃系统来驱动机器。

卢瑟福说:“我们已经看到了飞机越来越趋于电动化的势头。”他指的是波音“梦想飞机”,尽管还存在一些重大的磨合问题,但这个机型使用电池来为其电脑提供电力。在“太阳动力号”所显示的开拓性先进技术以及目前即将服役的最先进商业飞机之间,“你肯定能看到重合之处”,卢瑟福在接受 《国家地理》采访时说。

为“太阳动力号”提供太阳能电池的SunPower公司八年来一直致力于这一项目,大大推进了耐用太阳能设备领域的技术。该公司用在太阳能赛车“本田梦想”( Honda Dream)和美国航空航天局(NASA)的格陵兰冰盖探测器上的技术,也正应用于住宅和商业项目。

皮卡德希望这能为创建一个世界清洁技术委员会奠定基础, “专家学者们可以通过这个机构向各国政府和大企业提供建议,指出利用哪种技术可以在营利的同时抵御气候变化和保护环境”。

两位创始人已经与谷歌合作发起了一项“未来清洁”倡议,旨在突出清洁技术在实现去年巴黎气候大会目标中的巨大潜力。

尽管如此,“太阳动力号”不太可能为航空产业的去碳化提供一个解决方案。

虽然太阳能可以成为小型飞机的飞行动力,但不可能作为更重的大型商业客机的实用驱动,就算用上能效最高的太阳能板也不行。即便如此,航空排放的问题已经不能再被忽视了。据某些估算,从纽约到伦敦的单人往返飞行所产生的温室气体相当于一栋住宅全年的取暖排放。如果我们想要成功实现遏制全球变暖的目标,就必须为航空业找到替代能源。

Thursday, August 16, 2018

巴西环保法案要退步?

针对巴西总统迪尔玛·罗塞夫的弹劾愈演愈烈,趁此巴西政治动荡之际,保守派政客不顾巴西在巴黎气候协议中许下的承诺,开始悄悄压制本国环境和原住民区保护法律。环保人士表示,目前宪法修正案( / )还处于参议院讨论阶段。该法案一旦获批,大型基础设施项目就可以直接开工,无需考虑工程本身对生物多样性、本土环境、原住民区、传统社区以及自然保护区的影响。

以往项目获批前都要经过冗长而严格的科学性审查,其中涉及生物学、植物学、人类学和考古学等多方面研究。而如今,开发商只需在被允许开工前提供一份环境影响研究提案,甚至都不用真正进行这份调查。而且一旦项目开工,环境保护机构就不能取消或暂停这个项目。

来自政府与非政府机构的环境组织都对这项法案的潜在影响提出了严重抗议。巴西环境与可再生资源官方机构
负责人玛里琳·拉莫斯认为,这项举措意味着巴西正在走向一条与发达国家相悖的道路,而且将永远没有能力控制本国基础设施项目了。

巴西-亚马逊土著居民联合会(简称COIAB)领导人娜拉·巴雷表示:“巴西的确在巴黎峰会上提出了自己的环保目标,但是却没有尽到自己应尽的义务——保护森林,以及居住在森林里的居民。”非政府环境保护组织PROAM主席卡洛斯·博库里认为:“这简直太荒唐了;就好像提交一份驾照申请,就有资格去开卡车一样。”

去年11月5日,巴西米纳斯吉拉斯州发生一起严重的水坝崩塌事故,造成大量有毒淤泥泄露,该事件被称为巴西历史上最严重的一次环境灾难。气候观测站组织(葡萄牙语译名)认为,在这样一个国家出台这样一个法案无疑是一个“冷笑话”。上述事故造成沿线所有动植物以及一条主要河流完全被毁,而且有可能是继切尔诺贝利事故之后全球最严重的一场灾难。绿色和平负责人马尔西奥·阿斯特尼表示:“如果这项提案最终变成了法案,那将带来一系列的悲剧。”

个人厉害关系

而对于其始作俑者、联邦参议员Acir Gurgacz来说,这项议案关系到他个人的利益:他的家族拥有一家运输公司,而且有可能在BR319高速公路铺设工程中获利不小。这条公路长达900公里,连接着亚马逊地区两大首府——波多韦柳和玛瑙斯。鉴于可能带来的环境破坏,目前该项目已经被IBAMA叫停。因为这条公路穿越的地区包括保护区、原住民区以及大片未经破坏的热带雨林。

提案起草者联邦参议员布莱罗·马吉是一位大豆行业的巨头,他在自己的家乡马托格罗索州已经清除了上万公顷的热带雨林。马吉将在本周上台的新政府中担任农业部长一职。

米歇尔·特梅曾是巴西副总统,并已于5月12日担任巴西代总统。但是,环保人士已经对他的政府执政方针表示出了深深的担忧,因为这项名为“搭设未来桥梁”的施政方针中并没有提到任何关于环境、气候变化和亚马逊热带雨林的内容。


而作为大农场主及大牧场主的游说集团,FPA(又称议会农业前线)向代总统提交了一份“具有积极影响的议程”,其中提到了一系列要求,比如废除土地改革部,中止并重新审议原住民保留地和Quilombos(逃跑奴隶的后代居住的地区)区域的划分,并对已经获得大量补贴的农业经济给予更多资金援助。除了这项终结环境授权的法案,其他一些破坏性法案也“蓄势待发”。

忽视当地民众意愿

一项名为PEC 215的法案已经在国会来来回回讨论了超过15年,随着新一届“亲农”政府的上台,这项法案有望正式变成法律。如果一切进展顺利,那么决定是否对原住民居住地(目前正在考虑的有近400处)边界进行进一步划分的权力就将从执行机构转移到国会。

目前国会参众两院中农业游说团的成员占大多数,这被认为相当于原住民居住地划分的终结。其他1611处奴隶后代居住地也将受到影响。上述这两种居住地的重要性在于,当地居民不会因为要进行商业农业生产或牧业养殖,就把原有森林毁灭一空。

根据法律,每个农业地权区(通常占地面积很广,尤其是亚马逊地区)中都必须留有一片野生区域。但是另外一项被提交考虑的措施( /16法案)却允许将这些野生区域直接用于牛群养殖。

还有一些法律允许在原住民区域进行矿业挖掘和
水电站建设,整个过程无需征得当地居民同意。巴西是现在全球最大的农药消费国,而减少对杀虫剂使用的控制是他们的另外一个目标。迪尔玛·罗塞夫政府没有在保护环境和原住民区域方面发挥楷模作用,不过现在看来,米歇尔·特梅尔政府恐怕更糟糕。