Sunday, November 11, 2018

मोदी सरकार की सफाई, नहीं मांगे आरबीआई के रिजर्व से 3.6 लाख करोड़

रिजर्व बैंक और मोदी सरकार के बीच जारी खींचतान के बीच केन्द्र सरकार ने सफाई दी है कि उसकी नजर आरबीआई के रिजर्व खजाने पर नहीं है. केन्द्र सरकार की तरफ से डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स सचिव एस सी गर्ग ने कहा कि केन्द्र सरकार ने रिजर्व बैंक से 3.6 लाख करोड़ रुपये लेने की पेशकश नहीं की है.
गर्ग ने दावा किया कि केन्द्र सरकार ने रिजर्व बैंक के इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क को दुरुस्त करने के तरीकों को इजात करने की पहल की है. इसके साथ ही केन्द्र सरकार की वित्तीय स्थिति को मजबूत करार देते हुए गर्ग ने कहा कि मीडिया में आरबीआई के रिजर्व खजाने पर सरकार की नजर को लेकर दुष्प्रचार किया जा रहा है. गर्ग ने दावा किया कि चालू वित्त वर्ष के अंत में (मार्च 2019) में केन्द्र सरकार अपना वित्तीय घाटा 3.3 फीसदी पर सीमित रखने में सफल होगी.     
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक केन्द्र सरकार 19 नवंबर को होने आरबीआई बोर्ड बैठक में अपना अहम एजेंडा सामने करते हुए बोर्ड में रिजर्व बैंक गवर्नर की भूमिका को कम करने का काम कर सकती है. दरअसल, खबर के मुताबिक केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक गवर्नर के बीच विवाद की अहम वजह केन्द्रीय रिजर्व बैंक के पास मौजूद 9.6 ट्रिलियन (9.6 लाख करोड़) रुपये की रकम है.
एक प्रमुख अखबार ने सूत्रों के हवाले से दावा किया था कि केन्द्र सरकार रिजर्व बैंक के पास पड़ी इस रिजर्व मुद्रा का लगभग एक-तिहाई हिस्सा लेना चाहती है. केन्द्र सरकार का रुख है कि इतनी बड़ी मात्रा में रिजर्व मुद्रा रखना रिजर्व बैंक की पुरानी और संकुचित धारणा है और इसे बदलने की जरूरत है. खबर के मुताबिक केन्द्र सरकार रिजर्व बैंक से चाहती है कि उसे इस रिजर्व मुद्रा से 3.6 ट्रिलियन रुपये दिए जाएं. केन्द्र सरकार इस मुद्रा का संचार कर्ज और अन्य विकास कार्यों पर खर्च के जरिए अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहती है.
गौरतलब है कि इंडिया टुडे कि रिपोर्ट के मुताबिक 19 नवंबर को होने वाली आरबीआई बोर्ड की प्रमुख बैठक में केन्द्र सरकार अपने नुमाइंदों के जरिए विवादित विषयों पर प्रस्ताव के सहारे फैसला करने का दबाव बना सकती है. दरअसल, रिजर्व बैंक बोर्ड में केन्द्र सरकार के प्रतिनिधियों की संख्या अधिक है लिहाजा फैसला प्रस्ताव के आधार पर लिया जाएगा तो रिजर्व बैंक गवर्नर के सामने केन्द्र सरकार का सभी फैसला मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा.रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी का ऐलान कर 1000 और 500 रुपये की करेंसी को प्रतिबंधित कर दिया. ऐलान के साथ ही दावा किया कि इस कदम से कालेधन पर लगाम लगेगी और नकली करेंसी को पकड़ने में मदद मिलेगी. मोदी सरकार के इस फैसले को केन्द्रीय रिजर्व बैंक ने ऐलान से महज 4 घंटे पहले मंजूरी दी थी. हालांकि, इस मंजूरी के साथ केन्द्रीय बैंक ने सरकार के दोनों बड़े दावों की लिखित बयान में हवा भी निकाल दी थी.
केन्द्रीय रिजर्व बैंक की 561वीं बैठक आनन-फानन में 8 नवंबर 2016 को शाम 5.30 पर बुलाई गई. इस बैठक में केन्द्रीय बैंक के डायरेक्टर्स ने नोटबंदी के फैसले को सरकार का एक साहसी कदम बताया. लेकिन केन्द्रीय बैंक ने चेतावनी भी दे दी कि नोटबंदी से उक्त वित्त वर्ष की जीडीपी पर नकारात्मक असर पड़ेगा.
रिजर्व बैंक बोर्ड की इस बैठक के मिनट्स पर रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल ने 5 हफ्ते बाद 15 दिसंबर,2016 को साइन किया. आरबीआई बोर्ड की मुलाकात के इन मिनट्स में बैंक ने 6 अहम आपत्तियों को शामिल किया. गौरतलब है कि मिनट के मुताबिक 7 नवंबर 2016 को वित्त मंत्रालय से नोटबंदी का प्रस्ताव पाने के बाद आऱबीआई डायरेक्टर की पहली आपत्ति सरकार की उस दलील पर थी जिसमें दावा किया गया कि नोटबंदी लागू करने से देश में कालेधन पर लगाम लगने के साथ नकली करेंसी को भी संचार से रोकने में मदद मिलेगी.
आरबीआई बोर्ड ने अपनी बैठक के मिनट्स में सरकार की उन सभी दलीलों को शामिल किया जो उसने नोटबंदी का फैसला लेने के लिए दी थी. सरकार की दलील पर बोर्ड बैठक ने अपना पक्ष रखा कि देश में अधिकांश कालाधन कैश की जगह रियल एस्टेट और सोने के तौर पर पड़ा है. लिहाजा, नोटबंदी से कालेधन के बड़े हिस्से पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
वहीं नकली करेंसी के दावे पर केन्द्रीय बैंक बोर्ड ने कहा कि देश में कुल नकली करेंसी का अनुमान महज 400 करोड़ रुपये का है ऐसे में नोटबंदी जैसे फैसले से इसे पकड़ने का फायदा भी नगण्य होगा.

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