Wednesday, May 29, 2019

特朗普访问日本:朝鲜阴影下的军事合作和贸易施压

军事合作,贸易逆差和朝鲜问题是美国总统四天访日主要议题。
特朗普周六(25)抵达日本,展开4天访日行程。特朗普将于周一与新天皇德仁会面,是日本进入“令和时代”后首位到访的外国元首。
特朗普抵日后,在美国驻日大使馆发表谈话,称此时是美日两国“前所未有,关系最紧密的时刻。”然而,特朗普在行前也表示将与日本首相安倍晋三商讨美日两国贸易“失衡”的情况。因此,即使美国与日本在外交军事上持续合作应对朝鲜的威胁,但经贸将持续施压日本。
此外,特朗普亦在抵达日本后,在推特上论及朝鲜问题。他表示,虽然朝鲜发射了“几枚小军武,惹恼了一些人”,但他完全不受影响,并相信金正恩会遵守两人间的承诺。特朗普也试图消除最近国际上对朝鲜导弹试验的担忧,似乎与其国家安全顾问相矛盾。美国国家安全顾问约翰·博尔顿( John Bolton )周六表示朝鲜最近的举动违反了联合国有关朝鲜的决议。
这已不是第一次特朗普与博尔顿在安全议题上持相反意见。在美国如何处理伊朗问题以及委内瑞拉危机等, 两人都意见相左。
去年特朗普和金正恩在新加坡会晤后,朝鲜和美国之间的和解似乎正在进行中。但最近几个月,在越南举办的第二次峰会未经达成协议后,两国关系降温。在紧张局势升级的情况下,朝鲜进行了几次武器试射。本月初,朝鲜测试了几枚“短程导弹”。朝鲜官方媒体称,金正恩亲自监督此次演习。
虽然测试没有违反朝鲜承诺不测试“远程”或核导弹的承诺。然而,它们引起日本不安。安倍上周在东京发表讲话,也称朝鲜近期发射的导弹“违反联合国安理会决议,极为令人遗憾”。
他说:“在与美国和其他国家密切合作的同时,我们正计划通过加强相关的联合国安理会决议的执行,来妥善解决这问题。”
就安倍来说,鉴于日本处于平壤的“武力直接影响圈”中,他也将要与美国讨论日本如何为未来美国与朝鲜的谈判作出贡献。朝鲜于2017年向日本方向发射了多枚导弹,导致特朗普告诉安倍,他的国家可以“必要时”拦截导弹。
美日贸易纷争=小规模易战?
在贸易问题上,特朗普周日会见日本商界领袖时提及美国对日本“长年贸易逆差”。他强调,日本应该加大在美国的投资,也需要面对美国出口产品到日本遇到的障碍及公平的问题。
“多年以来,日本在与美国贸易中占很大优势,但没关系,我们会让它变得更公平一点。”特朗普称。
有评论分析称,尽管特勒普此行两国亦会避免将贸易问题的对立“台面化”,但对特朗普来说,美国对日本的贸易谈判施压不会停止。特朗普正在计划对日产汽车增加关税,这可能会对日本经济最重要的支柱之一亦即“汽车业”造成损伤。
新数据显示,日本对美国的贸易顺差连续第二个月增长,汽车出口增长亦可观,这可能会使特朗普对日本贸易的施压加剧。
《日本时报》(Japan Times) 指出,安倍该是特朗普在国际上交情最好的国家领袖。特朗普在前往日本前,亦在媒体高调宣称自己会得到日本200年来最高规格礼遇。东京亦动员了2万多名警力参与特朗普访日的安保。此次访问亦将是特朗普与安倍一个月内两度会面。特朗普六月底,将出席在大阪举行的G20二十国集团峰会。
安倍除了与夫人在机场亲自迎接特朗普之外,周日(26)两人在东京近郊千叶县,打高尔夫球联谊,这是两人第5次的高尔夫球球叙。
军事方面,特朗普预计周二协同安倍巡访并登上日本最大的护卫舰“加贺号”(JS Kaga),并于神奈川县的“横须贺基地”(United States Fleet Activities Yokosuka)发表演说。该基地是美国海军“第七舰队”的据点,為美国与日本护卫队共同管理的军事要地,亦是美国国土以外唯一有能力接待美国航母的港口。日本《每日新闻》指出,特朗普此举有意向中国展示美国在太平洋地区的军事实力。

Monday, May 6, 2019

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

भारत में कुपोषण को लेकर ज़िला स्तर पर आंकड़े जुटाए जाते हैं.
इन आंकड़ों के आधार पर कुपोषण निवारण मुहिम की सफ़लता - विफ़लता भी ज़िला प्रशासन के स्तर पर ही आंकी जाती है.
इसी वजह से आज तक किसी सांसद को उसकी संसदीय सीट में कुपोषण को लेकर जवाबदेह नहीं ठहराया जा सका है.
लेकिन ये भी हक़ीक़त है कि किसी भी व्यापक राष्ट्रीय संकट से निबटने के लिए सार्थक नीतियों को बनाने की जिम्मेदारी सांसदों की होती है और सांसद समय समय पर अलग-अलग मुद्दों पर संसद में चर्चा करके नीतियों का निर्माण भी करते हैं
लेकिन हैरानी है कि कुपोषण दूर करने के लिए बनाई गई नीतियों की विफ़लता के लिए सांसदों की जवाबदेही तय करने के लिए कोई मापदंड नहीं है.
हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर अक्षय स्वामीनाथन और एस वी सुब्रमण्यन समेत कई विशेषज्ञों ने एक नए अध्ययन को सामने रखा है जिसकी मदद से कुपोषण को लेकर संसदीय सीटों के प्रदर्शन का आकलन किया जा सकता है.
इकॉनोमिक एंड पब्लिक वीकली में छपे इस अध्ययन के मुताबिक राहुल गांधी की संसदीय सीट अमेठी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसदीय सीट वाराणसी में कुपोषण का स्तर राष्ट्रीय प्रसार से कहीं ज़्यादा है.
इसके तहत स्टंटिंग, वेस्टिंग, अंडरवेट, और एनिमिया के आधार पर देश की 543 लोकसभा सीटों के प्रदर्शन को मांपा गया है.
इस अध्ययन में साल 2015-16 में जारी किए गए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में जारी आंकड़ों को इस्तेमाल किया गया है.
वाराणसी में स्टंटिंग 43 फीसदी, अंडरवेट 46 फीसदी, वेस्टिंग 24 फीसदी और एनीमिया 60 फीसदी है. जबकि भारत में स्टंटिंग 38 फीसदी, अंडरवेट 36 फीसदी, वेस्टिंग 23 फीसदी और एनिमिया 59 फीसदी है.
बीबीसी हिंदी ने यही जानने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संसदीय सीट वाराणसी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की संसदीय सीट अमेठी का दौरा किया.
आंकड़ों के लिहाज़ से कुपोषण दूर करने में इन दोनों सीटों का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से भी खराब है.
राहुल गांधी ने पांच राज्यों के चुनाव प्रचार के दौरान मध्य प्रदेश में कुपोषण के लिए मोदी को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि एक ओर मध्य प्रदेश में बच्चे कुपोषण से मर रहे हैं वहीं मोदी जी मार्केटिंग में व्यस्त हैं.
अगर नरेंद्र मोदी की बात करें तो मोदी ने भी समय-समय पर कांग्रेस पार्टी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कुपोषण के मुद्दे पर खरी-खोटी सुनाई है.
राहुल गांधी ने बीते पांच सालों में एक सांसद के रूप में संसद में कुपोषण की समस्या को लेकर एक भी सवाल नहीं उठाया है.
लेकिन इन दोनों बड़े नेताओं की लोकसभा सीटों में कुपोषण की मार झेल रहे बच्चों की स्थिति कुछ और ही कहानी बयां करती है.
कमर पर बंधा काला धागा, गले में लॉकेट और हाथों में काला धागा.
यहाँ के गांवों में नंग-धड़ंग घूम रहे बच्चों के तन-बदन पर ये चीज़ें सबसे पहले दिखाई देती हैं.
क्योंकि इन बच्चों की माओं के बीच कुपोषण को लेकर एक समझ का अभाव है.
ये महिलाएं आज भी अपने बच्चों के कमजोर या बीमार होने के लिए दैवीय आपदाओं को ज़िम्मेदार मानती हैं.
वाराणसी ज़िले में अतिकुपोषित बच्चों की संख्या चार हज़ार से भी ज़्यादा है. वहीं, अमेठी में हर छठा बच्चा कुपोषित है. ये आंकड़े सरकार के ही हैं और देश की उन चर्चित और हाई प्रोफ़ाइल सीटों के हैं, जिनकी नुमाइंदगी करने वाले एक व्यक्ति (नरेंद्र मोदी) ने पिछले पाँच साल तक नीतियां तय की हैं, और दूसरी सीट का प्रतिनिधित्व 15 साल से राहुल गांधी के हाथों में हैं.
ऐसे में सहज ही अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि कुपोषण जैसी समस्या को लेकर सरकारें और उनके प्रतिनिधि किस कदर गंभीर हैं.